वृन्दावन

वृन्दावन

वृन्दावन (Vrindavan), इस स्थान को भगवान श्री कृष्ण का स्थान कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा। कान्हा के बालकाल की लीलाएँ जिनमें छुपा है उनका नटखट अंदाज़, यही वह स्थान है जहाँ कभी कृष्ण ने कंस के भेजे राक्षसों का वध किया था तो कभी अपनी मुरली की धुन से गोपियों को वशीभूत। राधा रानी से की गई छेड़खानी और प्रेम की साक्षी है, वृन्दावन की यह पावन भूमि।

मथुरा से लगभग 15 किमी की दूरी पर स्थित वृन्दावन में श्री कृष्ण और राधा रानी के मंदिरों की विशाल संख्या है। यहाँ स्थित बांके बिहारी जी का मंदिर सबसे प्राचीन है। इसके अतिरिक्त यहाँ श्री कृष्ण बलराम, इस्कान मंदिर, पागलबाबा का मंदिर, रंगनाथ जी का मंदिर, प्रेम मंदिर, श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर, अक्षय पात्र, निधि वन आदि दर्शनीय स्थान हैं।

हरिवंश पुराण, श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण आदि में वृन्दावन की महिमा का वर्णन किया गया है। यहाँ की प्राकृतिक छटा बहुत आकर्षक है। तीन ओर से यमुना नदी से घिरे वृन्दावन में कई कुंज हैं जिनमें विभिन्न प्रकार के फूल इनकी शोभा और बढ़ाते हैं।

वृन्दावन की मिट्टी प्रेम और भक्ति दोनों ही रसों से लिप्त है। जहाँ कभी कान्हा और गोपियों की रासलीलाओं का मंचन होता है तो कभी मंदिर में गूंजते घंटें कृष्ण के प्रति अटूट विश्वास को जगाते हैं। यमुना के घाटों में जलते हजारों दीपक हर पर्यटक और श्रद्धालु के मन में अपार शांति और भक्ति की लौ रौशन कर जाते हैं।


वृन्दावन के बारे मे

लोई बाज़ार, वृन्दावन का सबसे प्रसिद्ध बाज़ार है जहाँ से पर्यटक कान्हा की मूर्तियों और धार्मिक वस्तुओं के अलावा हस्तनिर्मित वस्तुएं खरीद सकते हैं। एक ओर राधा धीरज बाज़ार चूड़ियों के लिए मशहूर है तो दूसरी ओर छत्ता बाज़ार से पर्यटक छोटी-मोटी वस्तुएं यादगार के तौर पर खरीदकर अपने साथ ले जा सकते हैं।

वृन्दावन की यात्रा सुविधाएं

  • मंदिर में अपने चप्पल या जूते उतारकर और पानी से हाथ व पैर धोकर ही प्रवेश करें
  • यहाँ के कई मंदिरों में चमड़े की वस्तुएं ले जाना और फोटो खींचना मना है
  • दान (Donation) करना चाहते हैं तो दानपेटी (Donation Box) में दान करें या दान की पर्ची अवश्य लें
  • सार्वजानिक वाहन का प्रयोग करने से पहले ड्राईवर का पहचान पत्र और वाहन का नंबर अवश्य देख लें

वृन्दावन का इतिहास

कुछ विद्वानों के अनुसार यह वह वृन्दावन नहीं है, जहाँ भगवान श्री कृष्ण ने अपनी दिव्य लीलाओं के द्वारा प्रेम एवं भक्ति का साम्राज्य स्थापित किया था। पौराणिक वर्णन के अनुसार, वृन्दावन के समीप गोवर्धन पर्वत की विद्यमानता बताई है जबकि आज वृन्दावन और गोवर्धन पर्वत काफी दूरी पर हैं। धीरे-धीरे यमुना का प्रवाह बदलने पर प्राचीन वृन्दावन के लुप्त हो जाने से नवीन स्थल पर वृन्दावन बसाया गया।

सन् 1718 ई. से सन् 1757 ई. तक ब्रजमण्डल में जाट राजाओं का आधिपत्य रहा। सन् 1757 ई. में अहमदशाह ने ब्रज मण्डल के मथुरा, महावन आदि तीर्थ स्थलों के साथ वृन्दावन को काफी लूटा उसके बाद सन् 1801 ई. के अंतिम काल में ब्रज मण्डल के अनेक क्षेत्रों पर पुन: जाटों का शासन हुआ और वृन्दावन को फिर से प्रतिष्ठित होने का अवसर मिला।

वृन्दावन की सामान्य जानकारी

  • राज्य- उत्तर प्रदेश
  • स्थानीय भाषाएँ- ब्रजभाषा, हिंदी, अंग्रेज़ी
  • स्थानीय परिवहन- बस, रिक्शा व टैक्सी
  • पहनावा- यहाँ महिलाऐं घाघरा-चोली, साड़ी और सूट से लेकर जींस तक पहनती हैं। पुरूष यहाँ धोती-कुर्ता, जींस, पैंट पहनते हैं।
  • खान-पान- माखन-चोर की नगरी होने के नाते, मथुरा और वृन्दावन दोनों ही जगह दूध से बने व्यंजन और मिठाइयाँ ज्यादा मिलती हैं। इसके अलावा पर्यटकों को यहाँ शाकाहारी भोजन अधिक मिलेगा जिसमें प्याज़ और लहसुन का भी प्रयोग नहीं किया जाता।

वृन्दावन के प्रमुख त्यौहार

  • होली (Holi)- दुनियाभर में मथुरा की होली अपने अनोखे अंदाज़ के लिए जानी जाती है। वृंदावन, नंदगाँव, बरसाना और गोकुल, मथुरा के इन स्थानों की होली देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को होली के कुछ नए अनुभवों से रूबरू करवाती है। 
  • जन्माष्टमी (Janmashtami)- कृष्ण जन्माष्टमी यानि भगवान कृष्ण का जन्मदिन। यह दिवस श्रावण महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन मनाया जाता है। वृन्दावन के सभी मंदिर फूलों की खुशबू और रंगबिरंगी रोशनियों से सज उठते हैं। नन्हें कान्हा का स्वागत छप्पन भोग लगाकर और दही हांडी फोड़कर किया जाता है।

इन उत्सवों के अलावा गोवर्धन पूजा, बसंत पंचमी, शिवरात्रि आदि त्यौहार भी बहुत धूमधाम से मनाये जाते हैं।