वाराणसी

वाराणसी

उत्तर प्रदेश में स्थित वाराणसी (Varanasi) संसार का सबसे पुराना शहर माना जाता है। भगवान भोलेनाथ की नगरी कहे जाने वाले इस शहर को बनारस और काशी भी कहकर पुकारा जाता है। पवित्र गंगा नदी के तट पर बसा ये शहर केवल हिन्दुओं के लिए ही नही बल्कि बौद्ध एवं जैन धर्म के लोगों के लिए भी काफी पवित्र माना जाता है। 

माँ गंगा और भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग रूप में यहाँ निवास करना, इस काशी नगरी को अत्यंत धार्मिक और जीवंत शहर बनाता है। वाराणसी के प्रमुख पर्यटन स्थलों में वाराणसी के घाट, सारनाथ, काशी विश्वानाथ मंदिर, धम्मेक स्तूप (Dhammek Stupa), संकटमोचन हनुमान मंदिर आदि प्रमुख हैं। 

आध्यात्म, इतिहास और संस्कृति के अलावा यह शहर बनारसी साड़ी और बनारसी पान के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। इसके अलावा इन दिनों यह शहर मलमल और रेशमी कपड़ों, इत्रों, हाथी दांत और शिल्पकला के लिए व्यापारिक एवं औद्योगिक केन्द्र के रुप में उभरा है।


वाराणसी के बारे मे

वाराणसी एक धार्मिक स्थान है लेकिन इसके बावजूद यह शॉपिंग के दीवानों को कतई निराश नहीं करता। यदि आप वाराणसी की यात्रा पर हैं और खरीदारी के शौकीन हैं तो यहाँ बहुत से ऐसे बाजार हैं जहां से आप खरीददारी कर सकते हैं। 

सिल्क की साड़ी या विश्व प्रसिद्ध बनारसी साड़ी खरीदना चाहते हैं तो सबसे अच्छी जगह है विश्वनाथ गली में स्थित टैम्पल बाजार (Temple bazaar)। इसके अलावा पीतल के बर्तन ठठेरी बाजार से और ज्ञानवापी बाजार (Gyanvapi) से सोने के गहने खरीद सकते हैं। वाराणसी की यात्रा के दौरान पर्यटक धार्मिक पुस्तकें भी खरीद सकते हैं।

वाराणसी की यात्रा सुविधाएं

  • वाराणसी की यात्रा के दौरान अपने साथ पानी की बोतल जरूर साथ रखें
  • वाराणसी में त्यौहार या स्नान के अवसर पर काफी भीड़ होती है, इस दौरान निजी वस्तुओं का ध्यान रखें
  • भीड़भाड़ वाले इलाके में कीमती सामान लेकर ना जाएं
  • वाराणसी में घाट पर घूमते समय नदी में पूजा सामग्री बहाकर उसे गंदा न करें
  • वाराणसी के गंगा घाट पर होने वाली सुबह और शाम की आरती में शामिल होने का अवसर न छोड़ें
  • वाराणसी एक धार्मिक स्थान है, यहां शराब पीने या अन्य अनैतिक कार्य करने से बचें

वाराणसी का इतिहास

पौराणिक कथाओं के अनुसार लगभग पांच हजार वर्ष पूर्ण भगवान शिव ने स्वयं काशी नगर की स्थापना की थी। हालांकि वाराणसी को 3000 वर्ष पुराना ही माना जाता है। महात्मा बुद्ध के समय में, वाराणसी, काशी राज्य की राजधानी था। उन्होंने वाराणसी के निकट सारनाथ में अपना पहला प्रवचन दिया था। गहड़वाल राजवंश के संस्थापक ने साल 1090 में बनारस को दूसरी राजधानी बनाया। मौर्य वंश के शासन काल के दौरान वाराणसी को तक्षशिला से पाटलिपुत्र वाले सड़क मार्ग द्वारा जोड़ा गया।

16वीं शताब्दी में मुग़ल बादशाह अकबर ने शहर में दो मंदिर बनवाए, जिनमें से एक भगवान् शिव को और दूसरा विष्णु जी को समर्पित था। 18वीं शताब्दी में मराठा और भूमिहार राजाओं ने शहर को और विकसित किया। 1910 में ब्रिटिश प्रशासन ने वाराणसी को एक नया भारतीय राज्य बनाया जिसका मुख्यालय रामनगर को बनाया गया। 1947 में वाराणसी भारतीय संघ का हिस्सा बन गया।

वाराणसी की सामान्य जानकारी

  • राज्य-  उत्तर प्रदेश
  • स्थानीय भाषाएँ- हिन्दी, भोजपुरी और अंग्रेजी
  • स्थानीय परिवहन- रिक्शा, ऑटोरिक्शा, टैक्सी, कैब, टैम्पो, बस
  • पहनावा-  वारणसी की महिलाएं बनारसी साड़ी और सूट पहनती हैं जबकि यहाँ के पुरुष धोती -कुर्ता और पैंट शर्ट पहनते हैं। 
  • खान-पान- वाराणसी अपने स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहाँ मिलने वाले स्ट्रीट फूड में मूंग-दाल की कचौड़ी के साथ रसदार सब्जी, आलू- पूरी, पानी- पूरी, आलू-टिक्की, जलेबी, दही-वडा, चाट, लिट्टी- चोखा, लस्सी, ठंडाई (Thandai) आदि काफी प्रसिद्ध हैं। वाराणसी में दूध और दही से बने सामान जैसे लस्सी, मलाईदार दूध, ठंडाई, रसमलाई आदि का स्वाद भी अवश्य लेना चाहिए। इसके अलावा वाराणसी की यात्रा के दौरान यहाँ का पान खाना बिलकुल न भूलें।