तिरुपति

तिरुपति

मंदिरों के शहर (City of Temples) "तिरुपति" (Tirupati) को साक्षात् भगवान विष्णु का वास स्थल माना जाता है। कहा जाता है कि आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित इस शहर को स्वयं श्री हरि विष्णु ने वैकुण्ठ के बाद, सबसे अधिक महत्व दिया था। भगवान विष्णु को यहाँ बालाजी, वेंकटेश्वर, गोविंदा, वेंकटरमण और श्रीनिवास के नाम से पूजा जाता है। तिरुपति नाम दो शब्दों से मिलकर बना है- "तिरू" यानि "सम्माननीय" और "पथि" यानि "पति" अर्थात सम्मानीय पति।

दक्षिण भारत के महत्तवपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में प्रख्यात यह शहर प्रत्येक वर्ष हज़ारों लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहाँ स्थित वेंकटेश्वर मंदिर (Venkateswara Temple) तिरुमाला की सात पहाड़ियों में से एक वेंकटाद्री पर्वत पर विराजमान है। इसके अलावा कोदंडा राम स्वामी मंदिर, पद्मावती मंदिर भी इस शहर के दर्शनीय स्थल हैं।

मंदिरों के साथ-साथ यहाँ मिलने वाले लाल लकड़ी के खिलौनों, तांबे और पीतल से बनी मूर्तियाँ भी देशभर में प्रसिद्ध हैं। तिरुपति शहर दक्षिण राज्य में आर्थिक और शैक्षिक प्रणाली का भी केंद्र है।


तिरुपति के बारे मे

तिरुपति में होने वाली लकड़ी की नक्काशी (Wood Carving) काफी प्रसिद्ध है। आकर्षक सफ़ेद लकड़ी के खिलौने यहाँ कई दुकानों पर देखे जा सकते हैं। तंजौर की गोल्ड लीफ पेंटिंग्स भी पर्यटकों द्वारा पसंद की जाती हैं, कला के ऐसे अद्भुत नमूने आप जरुर खरीदना चाहेंगें।

तिरुपति की यात्रा सुविधाएं

  • तिरुपति शहर में धूम्रपान, शराब, मांसाहारी आदि का सेवन मना है
  • तिरुमला की पहाड़ियों पर चढ़ने से पहले अपने जूते चप्पल उतार लें
  • तिरुपति के मंदिरों में कैमरा, मोबाईल आदि ले जाना वर्जित है
  • तिरुपति की यात्रा पर जाते समय साड़ी, कुर्ता-धोती/पजामा जरूर रखें
  • अपने साथ जरूरी दवाईयां भी ले कर जाएं
  • तिरुपति मंदिर में दर्शन या सेवा के इच्छुक हों तो तिरुमला की वेबसाइट पर जाकर पहले से ही बुकिंग कर लें

तिरुपति का इतिहास

तमिल साहित्य के प्राचीनतम स्त्रोत "संगम साहित्य" में तिरुपति का त्रिवेंगदम (Thrivengadam) नाम से उल्लेख मिलता है। जिसे तमिल राज्यों की उत्तरी सीमा के लिए प्रयुक्त किया जाता था।

मौर्य और गुप्त शासनकाल के पौराणिक साहित्य में भी तिरुपति को "आदि वाराह क्षेत्र" (Aadi Varah Kshetra) के नाम से संबोधित किया गया है। पुराणों में भगवान वाराह को भगवान विष्णु का अवतार कहा गया है।

तिरुपति की सामान्य जानकारी

  • राज्य- आंध्र प्रदेश
  • स्थानीय भाषाएँ- तेलुगु, अंग्रेज़ी
  • स्थानीय परिवहन- ऑटो, बस, रिक्शा
  • पहनावा- यहाँ महिलाएं साड़ियाँ और सलवार-कमीज़ दोनों पहनती हैं। कांजीवरम, मंगलागिरी कॉटन और धर्मावरम साड़ियाँ पूरे देशभर में प्रसिद्ध हैं। यहाँ के पुरुष सुनहरी किनारी वाली धोती पहनते हैं।
  • खान-पान- धार्मिक महत्व होने के कारण, तिरुपति में केवल शाकाहारी भोजन ही मिलता है लेकिन खाने के कई विकल्प किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं। इडली, डोसा, वड़ा, उपमा, स्वीट राइस, हलवा, रवा खिचड़ी, पोंगल, भोजन-थाली, अकुकुरा, वडालू, सेमिया पायसम और लड्डू जैसे व्यंजनों की महक आपको इनका स्वाद चखने के लिए अपनी ओर खींच ही लेगी।

तिरुपति के प्रमुख त्यौहार

  • तिरुपति ब्रह्मोत्सवम त्यौहार (Tirupati Brahmotsavam festival)- तिरुपति में सितंबर/अक्टूबर महीने में 9 दिनों तक ब्रह्मोत्सव मनाया जाता है, जिसमें देवी-देवताओं की रथ यात्रा निकाली जाती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान बालाजी के लिए सर्वप्रथम यह उत्सव स्वयं भगवान ब्रह्मा जी ने मनाया था। इस त्यौहार को तिरुपति त्यौहार के नाम से भी जाना जाता है।
  • मकर संक्रांति (Makar Sankranti)- साल के मध्य जनवरी में मनाए जाने वाले मकर संक्रांति के त्यौहार का महत्तव तिरुपति में एहम् है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाता है, तब सूर्य की उत्तर यात्रा या उत्तरायानम आरंभ हो जाती है। इसी मौके पर मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है।

इनके अतिरिक्त वैकुण्ठ एकादशी, राम नवमी, जन्माष्टमी, वसंतोत्सव और रथसप्तमी भी यहाँ धूमधाम से मनाये जाते हैं।