शिरडी

शिरडी

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले (Ahmednagar) में स्थित, देश के प्रसिद्ध तीर्थस्थानों में से एक है "शिरडी (Shirdi)"। मुंबई से करीब 240 किलोमीटर और अहमदनगर से लगभग 85 किलोमीटर दूर शिरडी, साईं बाबा (Sai Baba) का समाधि स्थल है। साईं बाबा को भगवान की संतान माना जाता है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन एक फ़कीर की तरह व्यतीत किया था।

साईं बाबा का अस्तित्व शुरुआत से रहस्यमयी रहा है, उनका जन्मस्थान, माता-पिता, धर्म-जाति, घर-रिश्तेदार आदि तथ्यों की जानकारी किसी के पास नहीं है लेकिन अपनी शिक्षाओं "श्रद्धा और सबूरी" व "अल्लाह मालिक" और "सबका मालिक एक" जैसे दिव्य शब्दों से बाबा ने अपने भक्तों के हृदय में सदा के लिए जगह बना ली।

लगभग 200 वर्ग मीटर में फैला साईं बाबा मंदिर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है। इस मंदिर की ख़ास बात यह है कि बाबा के दर्शन करने वालों में सभी धर्म और जाति के भक्त सम्मिलित होते हैं। हर तरह के भेदभाव को नकारती और एकता को दर्शाती यह प्रक्रिया बरसों से चली आ रही है।

भक्तों का मानना है कि बाबा अभी भी जीवित हैं और उनकी पुकार सुनकर सभी इच्छाएँ पूरी करते हैं। यदि आप गहरी आस्था और श्रद्धा के साक्षी बनना चाहते हैं तो एक बार शिरडी की यात्रा अवश्य करें। शनि शिंगणापुर धाम यहाँ का निकट दर्शनीय स्थल है।


शिरडी के बारे मे

श्री साईं बाबा समाधि मंदिर के पास कई छोटी-छोटी दुकानें स्थित हैं यहाँ मिलने वाली लगभग सभी वस्तुएं साईं बाबा से जुड़ी हैं जैसे मंदिर में चढ़ाने के लिए फूल मालाएं, साईं बाबा की मूर्तियाँ-चित्र, साईं बाबा के जीवन से संबंधित किताबें और सीडी आदि।

शिरडी की यात्रा सुविधाएं

  • उत्सव के दौरान होटल बुकिंग पहले से करवाएं
  • श्री साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट द्वारा पर्यटकों को सभी जरूरी सेवाएँ प्रदान की जाती हैं
  • एक प्रमुख तीर्थस्थल होने के कारण अधिकतर समय यहाँ भक्तों की भीड़ रहती है

शिरडी का इतिहास

साईं बाबा की नगरी कहे जाने वाले शिरडी के इतिहास के बारे में ज्यादा तथ्य नहीं हैं। कहा जाता है कि शिरडी में सर्वप्रथम साईं को एक नीम पेड़ के नीचे देखा गया था तब उनकी आयु करीब 16 वर्ष थी। इसके बाद वे पुनः सन् 1858 में यहाँ आये और अपना सम्पूर्ण जीवन मददगारों और पीड़ितों की सहायता में व्यतीत कर दिया। 15 अक्टूबर 1918 को विजयदशमी के दिन साईं बाबा ने समाधि ली थी जिस स्थल पर आज साईं मंदिर स्थित है। उसके बाद से ये जगह दिन प्रतिदिन प्रसिद्ध होती चली गई।

शिरडी की सामान्य जानकारी

  • राज्य- महाराष्ट्र
  • स्थानीय भाषाएँ- मराठी, हिंदी, अंग्रेजी
  • स्थानीय परिवहन- टैक्सी, ऑटोरिक्शा, बस
  • पहनावा- महाराष्ट्र का एक हिस्सा होने के नाते शिरडी के पारंपरिक परिधान भी यहाँ के अन्य शहरों के समान हैं। महिलाएं नौवारी (Nauvari) कही जाने वाली एक प्रकार की साड़ी पहनती हैं और पुरुष धोती के साथ कमीज पहनते हैं। इसके साथ ही अधिकतर पुरुष एक विशेष पगड़ी पहनते हैं जिसे फटका या फेटा जैसे नामों से जाना जाता है। हालाँकि आज के समय में पश्चिमी पहनावे का असर इस छोटे से शहर में भी देखने को मिलता है जहाँ युवक-युवतियां जींस, शर्ट जैसे परिधान भी पहनते हैं।
  • खानपान- अन्य धार्मिक स्थलों की तरह यहाँ भी मुख्य रूप से शाकाहारी भोजन मिलता है, जिनमें दक्षिण भारतीय व पूर्वी भारतीय व्यंजन शामिल हैं। श्री साईंबाबा संसथान ट्रस्ट द्वारा चलाये जाने वाले प्रसादालय में पर्यटकों व श्रद्धालुओं को मामूली कीमत में स्वादिष्ट भोजन करवाया जाता है और इसके साथ ही भोग के लिए चढ़ाया जाने वाला बूंदी का लड्डू भी पर्यटक यहाँ से ले सकते हैं।

शिरडी के प्रमुख त्यौहार

  • श्री साईं बाबा पुण्यतिथि उत्सव (Shri Sai Baba Punyatithi Festival)- प्रत्येक वर्ष विजयदशमी के दिन (सितम्बर-अक्टूबर) साईं बाबा की पुण्यतिथि मनाई जाती है। विजयदशमी के एक दिन पहले और एक दिन बाद (3 दिन) तक यह उत्सव मनाया जाता है जिसमें देशभर से श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने लिए एकत्रित होते हैं। माना जाता है कि दशहरे के दिन ही साईं बाबा ने समाधि ली थी।

इसके अलावा होली, रामनवमी, दिवाली और गुरुपूर्णिमा आदि त्यौहार भी शिरडी में धूमधाम से मनाये जाते हैं। इन उत्सवों के दौरान होने वाले भजन, कीर्तन, कव्वालियाँ, पूजा आदि धार्मिक कार्यक्रम, माहौल को पवित्रता व सकारात्मकता से भर देते हैं।