मथुरा

मथुरा

यमुना नदी के घाटों पर स्नान करते श्रद्धालु, मंदिरों की आरतियाँ, वातावरण में गूंजता हरे-कृष्णा  का स्वर और राधे-राधे का नाम- ये नज़ारा है कृष्ण जन्मभूमि मथुरा का।
गोपाल, माखनचोर, कान्हा या कृष्णा, भगवान के हर नाम की तरह ही पवित्र है मथुरा की मिट्टी। उत्तर प्रदेश राज्य के इस शहर और जिले के कण-कण में वास करते हैं श्री कृष्ण, इसीलिए आपको यहाँ की हर गली में राधा-कृष्ण का मंदिर और हर किसी के मुख से केवल उन्हीं का नाम सुनाई देगा। मंदिरों की इस नगरी का कृष्ण जन्मस्थान मंदिर हो या द्वारिकाधीश मंदिर, राधा कुंड हो या विश्राम घाट हर एक स्थान की अपनी पहचान और धार्मिक महत्ता है। मथुरा में 25 घाट हैं और  शाम के वक़्त यमुना नदी में लोगों की आस्था के सैकड़ों जलते दीपक, कान्हा के प्रति उनके विश्वास को दर्शाते हैं।


मथुरा के बारे मे

मथुरा में दूध से बनी मिठाईयां बहुत प्रसिद्ध हैं। मथुरा के पेड़े के अलावा पर्यटक यहां से सुंदर गहने और भगवान की मूर्तियां खरीद सकते हैं।

मथुरा की यात्रा सुविधाएं

  • मथुरा के किसी भी मंदिर में दान करने की इच्छा हो तो केवल दानपेटी में ही दान दें। लोकल गाइड्स के बहकावे में ना आएं।
  • अधिकतर मंदिरों में मोबाईल, कैमरा आदि ले जाना निषेध है।
  • मथुरा का पर्यटन करने के लिए होली के दौरान जा सकते हैं लेकिन पहले से होटल बुकिंग और टिकट करवा लें
  • यमुना नदी में बोटिंग का आनन्द ले सकते हैं।

मथुरा का इतिहास

मथुरा का इतिहास त्रेता युग से जुड़ा है, यही वह स्थान है जहाँ भगवान श्री राम के भाई शत्रुघन, ने लावन राक्षस को मारकर "मठुरा" शहर बसाया था और द्वापर युग में श्री कृष्ण ने अपने मामा कंस के अत्याचारों से दुनिया को मुक्ति दिलाने हेतु जन्म लिया था। मथुरा को कई युगों तक मधुपुरी, मधुनगरी, मधुबन, मधुरा आदि नामों से संबोधित किया जाता रहा, जोकि मथुरा पर आकर ठहर गया। कहा जाता है कि मथुरा कभी बौद्ध धर्म का भी केंद्र हुआ करता था इसीलिए आज भी मथुरा में कई बौद्ध मंदिर मौजूद हैं।

मथुरा की सामान्य जानकारी

  • राज्य- उत्तर प्रदेश
  • स्थानीय भाषाएँ- हिंदी, बृजभाषा, अंग्रेज़ी
  • स्थानीय परिवहन- टेम्पो, रिक्शा, साइकल, टांगा
  • पहनावा- औरतें यहाँ साड़ी, सूट पहनती हैं और आदमी कुर्ता, धोती, पजामा।
  • खान-पान- मथुरा का सबसे प्रसिद्ध व्यंजन है- पेड़ा, लेकिन खरीदने से पहले दूकान के बाहर लोगों की भीड़ देख लें अगर ज्यादा लोग नज़र आये तो समझ लीजियेगा कि आप सही और असली पेड़े का स्वाद चखने वाले हैं इसके अलावा समोसा-कचौड़ी, पूरी-आलू, जलेबी, ठोकला, पोहा, टमाटर चाट, दूध से बनी मिठाई, लस्सी, खोए की मिठाई, सोन पापड़ी, घेवर आदि चखना न भूलना।

मथुरा के प्रमुख त्यौहार

  • होली (Holi)- दुनियाभर में प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा की होली अपने अनोखे अंदाज़ के लिए जानी जाती है। वृंदावन, नंदगाँव, बरसाना और गोकुल, मथुरा के इन स्थानों की होली देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को होली के कुछ नए अनुभवों से रूबरू करवाती है। राधा जी के गाँव बरसाना (Barsana) और श्री कृष्ण के गाँव नंदगाँव (Nandgaon) की लट्ठमार होली (Lathmar Holi), मथुरा की होली की एक अद्भुत और रोचक तस्वीर दिखाती है। होली की शुरुआत बरसाना से होती है जब यहाँ की महिलाएं बरसाना आये नंदगाँव के पुरुषों को लट्ठ से मारती हैं और पुरुष एक लोहे की ढाल से अपना बचाव करते हैं। इसके एक दिन बाद यही नज़ारा नंदगाँव में देखा जा सकता है।
  • जन्माष्टमी (Janmashtami)- कृष्ण जन्माष्टमी यानि भगवान कृष्ण का जन्मदिन। यह दिवस श्रावण महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन मनाया जाता है। मथुरा के सभी मंदिर फूलों की खुशबु और रंगबिरंगी रोशनियों से सज उठते हैं। नन्हें कान्हा का स्वागत छप्पन भोग लगाकर और दही हांड़ी फोड़कर किया जाता है।
  • ब्रज परिक्रमा (Braj Parikrama)- ब्रज मंडल परिक्रमा जिसे चौरासी कोस (84 Kos Parikrama) भी कहते हैं, इस परिक्रमा में बारह वन, चौबीस उपवन, गोवर्धन पर्वत और पवित्र यमुना नदी शामिल हैं। ब्रज परिक्रमा में भगवान कृष्ण से जुड़े प्रत्येक स्थल के दर्शन किए जाते हैं। लगभग 1 महीने से भी अधिक चलने वाली इस यात्रा में वृन्दावन और मथुरा शहर के कुछ हिस्सों की भी परिक्रमा की जाती है।