केदारनाथ

केदारनाथ

उत्तरी भारत के पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक "केदारनाथ” (Kedarnath) हिमालय की गोद में बसा एक धार्मिक शहर है। 3584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह शहर भगवान शिव की भूमि कही जाती है। यह स्थान भगवान शिव बारह ज्योतिर्लिंग में से एक विशाल "केदारनाथ मंदिर" के लिए प्रसिद्ध है।
गढ़वाल क्षेत्र में बसा यह शहर अद्भभुत सुंदरता, ऊंचे पहाड़ों और धार्मिक महत्तवता का मिलाजुला संगम है। भारत के "छोटे चार धामों" में से एक धाम और "पंच केदार" का हिस्सा होने का गर्व भी इस शहर को प्राप्त है। मंदाकिनी नदी की घाटी में बसा यह शहर देश-भर के शिव भक्तों के लिए एक विशेष आस्था का केंद्र है।


केदारनाथ के बारे मे

केदारनाथ से पर्यटक भगवान शिव और मां पार्वती की तस्वीरें, मूर्तियां खरीद सकते हैं। इनके अलावा यहां से रूद्राक्ष माला, क्रिस्टल, जड़ी बूटी, कीमती पत्थर, तुलसी की माला आदि भी खरीद सकते हैं। 

केदारनाथ की यात्रा सुविधाएं

  • जरूरी दवाईयां साथ रखें
  • तीर्थयात्रियों के लिए यहां पोनी-घोड़े की भी सुविधा उपलब्ध है।
  • अपने साथ गर्म कपड़े अवश्य रखें।
  • मांस-मच्छी व शराब का सेवन न करें।
  • निर्देशित मार्ग पर ही चलें, अन्य वाहनों का मार्ग अवरुद्ध न करें

केदारनाथ का इतिहास

कुरूक्षेत्र की लड़ाई के बाद पांडव, भगवान शिव का आर्शीवाद लेने वाराणसी पहुंचे ताकि वह अपने भाई कौरवों की हत्या का पाप अपने सिर से उतार सकें। भगवान शिव, पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे इसीलिए वह काशी से उत्तराखंड की गुप्तकाशी की पहाड़यों में छिपने चले गए। भगवान शिव का पीछा करते करते पांडव गुप्तकाशी भी पहुंच गए और उनसे छिपते हुए भगवान भोलेनाथ केदारनाथ में जा बसे।

केदारनाथ की सामान्य जानकारी

  • राज्य- उत्तराखंड
  • स्थानीय भाषाएँ- हिंदी, गढ़वाली, 
  • स्थानीय परिवहन- ऑटो, बस, रिक्शा, पोनी घोड़े
  • पहनावा- ठंडा क्षेत्र होने के करण यहाँ गर्म ऊनी कपड़े पहने जाते हैं।
  • खान-पान- केदारनाथ में आपको केवल शु्द्ध शाकाहारी भोजन मिलेगा। केदारनाथ नगरी में शराब, धूम्रपान का सेवन भी वर्जित है। यहां आपको खाने के लिए कई छोटे बड़े होटल मिल जाएंगे जहां से शाकाहारी भोजन कर सकते हैं।

केदारनाथ के प्रमुख त्यौहार

बद्री केदार फेस्टिवल (Badri Kedar Festival)- जून के महीने में बद्री केदार त्यौहार केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिरों में धूमधाम से मनाया जाता है। लगातार आठ दिनों तक चलने वाला यह त्यौहार देश-भर से विभिन्न भक्तों व कलाकारों को एकजुट करने का भी काम करता है।