हरिद्वार

हरिद्वार

हिंदुओं के महत्तवपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक पवित्र गंगा नदी के किनारे बसा है- हरिद्वार (Haridwar)। हरिद्वार यानि "हरि का द्वार" या "हरि तक पहुंचने का द्वार"। हरिद्वार को देव भूमि और "चार धाम का द्वार" (Gateway of Chardham) भी कहा जाता है। भगवान शिव (हर) के भक्त इस स्थल को "हरद्वार" और श्री विष्णु (हरि) के भक्त इस स्थल को हरिद्वार कहते हैं। हरिद्वार में भगवान विष्णु के पदचिन्हों को देख अनुमान लगया जा सकता है कि यहाँ की धरती कितनी पवित्र है।
अनेक मंदिरों, प्राचीन सिद्धिपीठ, शक्तिपीठ होने के कारण इसे धर्म की नगरी भी कहते हैं। हरिद्वार सदियों से कला, विज्ञान और संस्कृति को सीखने-सिखाने का केंद्र रहा है। आयुर्वेदिक दवाओं और हर्बल उपचार के क्षेत्र में हरिद्वार का अनूठा स्थान है। ऐसी मान्यता है कि हरिद्वार में गंगा नदी में डुबकी लगाकर मनुष्य को मोक्ष प्राप्त हो जाता है।

हरिद्वार के बारे मे

हरिद्वार जाएं तो रूद्राक्ष की माला अवश्य खरीदें। यहाँ के बड़ा बाजार, मोती बाजार, ज्वालापुरी क्षेत्रों में पर्यटक खरीदारी कर सकते हैं। यह यहां की मुख्य शॉपिंग मार्केट्स हैं। हरिद्वार में धार्मिक वस्तुओं की खरीदारी ज्यादा की जा सकती है जैसे कि धार्मिक किताबें, मूर्तियां, सिंदूर। इसके अलावा पीतल के बर्तन, बेंत और बांस के उत्पाद, कीमती पत्थर, हर्बल  दवाएं, मसाले व आचार भी ले सकते हैं।

हरिद्वार की यात्रा सुविधाएं

  • दिवाली, होली या कुंभ मेले के दौरान यहाँ भीड़ तो अधिक होती है लेकिन इसी समय की यात्रा श्रेष्ठ मानी जाती है
  • गंगा में स्नान करते समय ध्यान रखें, ज्यादा गहराई और निर्धारित क्षेत्र से आगे न जाएँ
  • शाम की गंगा आरती देखने के लिए समय से थोड़ी पूर्व घाट पर पहुंचें

हरिद्वार का इतिहास

हरिद्वार का इतिहास सदियों पुराना है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी जगह पर राजा भागीरथ गंगा को स्वर्ग से धरती पर लेकर आए थे। हिंदू मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर सती ने अपने पिता राजा दक्ष द्वारा अपने पति शिव का अनादर होने पर खुद को यज्ञ कुंड में भस्म कर लिया था।
हरिद्वार को अतीत में मायापुरी, कपिल, गंगाद्वार के नाम से भी संबोधित किया गया है। समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत की बूंद इलाहबाद, नासिक और उज्जैन के अलावा यहाँ भी गिरी थी इसीलिए प्रत्येक बारह वर्ष में यहाँ कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है।

हरिद्वार की सामान्य जानकारी

  • राज्य- उत्तराखंड
  • स्थानीय भाषाएँ- हिंदी, अंग्रेजी, गढ़वाली, कुमाऊनी
  • स्थानीय परिवहन- रिक्शा, ऑटो, टैक्सी, बस
  • पहनावा- औरतें यहाँ साड़ी, सूट पहनती हैं और आदमी धोती-कुर्ता या पजामा पहनते हैं।
  • खान-पान- पवित्र व पावन स्थली होने के कारण हरिद्वार में केवल शाकाहारी भोजन ही मिलता है लेकिन व्यंजनों के प्रकार जैसे साउथ इंडियन डोसा व थाली, पंजाबी चना भटूरा व पराठा, समोसे, कचौड़ी आदि का स्वाद पर्यटकों को निराश नहीं करेंगें।

हरिद्वार के प्रमुख त्यौहार

  • कुंभ मेला (Kumbh Mela)- प्रत्येक 12 वर्षों में लगने वाला "कुंभ मेला” (Kumbh Mela), हमेशा से देशी व विदेशी सैलानियों को आकर्षित करता रहा है। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत की रक्षा करते हुए देवताओं द्वारा इसकी कुछ बूँदें इलाहाबाद, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में गिर गई थी, इसी वजह से इन अलग-अलग स्थानों पर हर चार साल में कुंभ मेला आयोजित किया जाता है जिससे हर एक स्थान पर 12 साल में मेला लगने का चक्र चलता है। देश-भर से साधु-संत, योगी, फकीर, भक्त इस मेले में भाग लेने आते हैं।
  • दिवाली (Diwali)- वैसे तो दिवाली पूरे भारत देश में बड़ी उत्सुकता और हर्षोल्लास से मनाया जाता है लेकिन हरिद्वार की दिवाली की रौनक देखते ही बनती है। दिवाली के पर्व पर हरिद्वार दीपकों की रौशनी से जगमगाता हुआ आलौकिक दिखाई देता है। इस दिन हरिद्वार हर गली, सड़क और घाटों को अलग-अलग दीयों, बत्तियों से सजाया जाता है। यहाँ के घाटों पर हज़ारों भक्त जमा होते हैं और शहर भर में यह उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।