अजमेर

अजमेर

राजस्थान राज्य के दिल में बसा अजमेर (Ajmer) शहर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। अरावली पहाड़ियों से घिरा यह शहर इस्लामी इतिहास और धरोहर का महत्वपूर्ण केंद्र होने के साथ ही, देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। अजमेर नाम अजयमेरु से बना है जिसका अर्थ होता है "अदृश्य पहाड़ी" (Invisible Hill)।

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह की स्थिति इस जगह को मुस्लिम समुदाय का प्रमुख तीर्थस्थल बनाती है। भारत का पहला पहाड़ी किला तारागढ़, सम्राट अकबर का किला, लाल पत्थरों से निर्मित जैन मंदिर, सावित्री मंदिर, अना सागर झील, अढाई दिन का झोपड़ा जैसे आकर्षक पर्यटन स्थल आपकी अजमेर यात्रा को यादगार बनाएँगे।


अजमेर के बारे मे

दरगाह बाज़ार यहाँ का सबसे प्रसिद्ध बाज़ार है जो दरगाह शरीफ के पास ही स्थित है। पर्यटकों को यहाँ से दरगाह के लिए जरूरी सामान के साथ-साथ खाने-पीने के लिए भी स्वादिष्ट व्यंजन मिल जाएंगें।

अजमेर की यात्रा सुविधाएं

  • गर्मियों में जा रहे हैं तो सूती कपड़े रखें
  • होटल में पहले से बुकिंग जरूर करवाएं
  • यहाँ से पुष्कर पास ही में है, यहाँ भी घूमने जा सकते हैं

अजमेर का इतिहास

7वीं शताब्दी में तत्कालीन राजा अजयपाल चौहान ने अजमेर शहर को बसाया था लेकिन इस शहर पर महमूद गौरी, राणा कुम्भा, मालवा के सुलतान, सम्राट अकबर, औरंगजेब, सिंधिया और अंग्रेजों का भी शासन रहा है।

अजमेर की सामान्य जानकारी

  • राज्य - राजस्थान
  • स्थानीय भाषाएँ - राजस्थानी, उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी
  • स्थानीय परिवहन - टैक्सी, ऑटो, साइकिल रिक्शा
  • पहनावा - राजपूत, मुस्लिम, जैन आदि धर्मों के लोग एक साथ यहाँ निवास करते हैं इसलिए पर्यटकों को यहाँ अलग-अलग संस्कृति के पहनावे देखने को मिलेंगें। कुर्ता-पजामा और बुर्खा यहाँ इस्लामी पहनावे को दिखता है और धोती-कुर्ता व घाघरा-चोली राजस्थानी पहनावा है।
  • खान-पान - राजस्थानी पकवानों जैसे दाल बाटी चूरमा, गट्टे की सब्जी, घेवर, बाजरे की खिचड़ी आदि के साथ-साथ पर्यटकों को यहाँ के दरगाह बाज़ार में मांसाहारी भोजन जैसे मटन और चिकन बिरयानी, मटन करी और कबाब भी मिल जाएंगें।

अजमेर के प्रमुख त्यौहार

उर्स मेला (Urs Fair)- उर्स मेला प्रतिवर्ष अप्रैल या मई माह में दरगाह शरीफ पर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की पुण्यतिथि (Death Anniversary) के रूप में मनाया जाता है। 6 दिनों के इस उत्सव में दरगाह को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है और यहाँ होने वाली कव्वालियाँ मेले की रौनक और बढ़ाती हैं।