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नीलकंठ पर्वत पर्यटन स्थल Neelkanth Peak Travel Guide

नीलकंठ पर्वत (Neelkanth Peak)

नीलकंठ, अर्थात नीले कंठ वाले भगवान शिव। बद्रीनाथ मंदिर के पीछे की ओर स्थित नीलकंठ पर्वत (Neelkanth Peak) का नाम भगवान भोलेनाथ के नाम से प्रेरित है। नीलकंठ पर्वत समुद्र तल से लगभग 6,560 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस शिखर को “गढ़वाल की रानी” (Garhwal Queen) के नाम से भी जाना जाता है। नीलकंठ पर्वत के उत्तर पश्चिम में सतोपंथ ग्लेशियर, दक्षिण पश्चिम में पनपटिया ग्लेशियर और पश्चिम दिशा की ओर गंगोत्री व हिम ग्लेशियर मौजूद हैं।

रोमांच पसंद करने वालों के लिए नीलकंठ पर्वत किसी सुनहरे मौके से कम नहीं है। सफ़ेद बर्फ की चादर ओढ़े पहाड़ और आसपास का मनोरम दृश्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

नीलकंठ के पास ही गौरी पर्वत एवं हाथी पर्वत स्थित हैं। यात्री नीलकंठ पर्वत पर ब्रह्म कमल क्षेत्र तक ही चढ़ाई कर सकते हैं। इससे आगे जाने की अनुमति पर्यटकों को नहीं होती क्योंकि आगे का मार्ग काफी मुश्किल और जोखिम भरा है। नीलकंठ की सुंदरता को समीप से देखने के लिए इस पर्वत के बेस कैंप तक ट्रैकिंग की जाती है।

नीलकंठ पर्वत का इतिहास (History of Neelkanth Peak)

कहा जाता है कि आज जहाँ नीलकंठ पर्वत स्थित है, पूर्व समय में वहाँ केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिरों के बीच एक सरल मार्ग था और मंदिर के पुरोहित रोज़ाना दोनों मंदिरों में पूजा-अर्चना करते थे। एक दिन उपासना में दोष हो जाने पर भगवान शिव नाराज़ हो गए और दोनों धामों के बीच पहाड़ की चोटी के रूप में खड़े हो गए। आज भी नीलकंठ पहाड़ के शिखर को ध्यानपूर्वक देखने पर भगवान शिव की प्रतिमा नज़र आती है।

नीलकंठ पर्वत का नक्शा Neelkanth Peak, Badrinath, uttarakhand Map

नीलकंठ पर्वत कैसे पहुंचेंHow to Reach Neelkanth Peak

नीलकंठ पर्वत की 6 किलोमीटर तक की चढ़ाई आसानी से पूरी की जा सकती है। बद्रीनाथ मंदिर से चरणपदुका तक और फिर वहां से नीलकंठ बेस कैम्प तक ट्रैकिंग कर पहुंच सकते हैं।<>

ध्यान रखने योग्य बातेंPoints to remember

  • नीलकंठ पर्वत पर ट्रैकिंग करने के लिए एक्स्ट्रा गर्म कपड़े,  ग्लव्स, बूट्स जरूर रखें
  • चढ़ाई (Trekking) केवल जून से सितंबर महीने के बीच ही होती है
  • अपने साथ जरूरी दवाइयां, गर्म कपड़े और ट्रैकिंग शूज़ ले जाना न भूलें
  • पर्वत की चढ़ाई से पहले चिकित्सा जांच (Medical Checkup) आवश्यक है

रोचक तथ्यInteresting Facts of Neelkanth Peak

पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं और असुरों के मध्य हुए समुद्र मंथन के दौरान निकले विष (Poison) को भगवान भोलेनाथ ने संसार की रक्षा के लिए, ग्रहण किया था और अपनी दैविक शक्तियों से उस विष को अपने कंठ में ही रख लिया था इस कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ (Neelkanth) कहलाये।<>

बद्रीनाथ में स्थित नीलकंठ पर्वत (Neelkanth Peak at Badrinath) एक अहम साहसिक कार्य (Adventure) पर्यटन स्थल (Tourist Place, Paryatan Sthal) है। नीलकंठ पर्वत में समय (Neelkanth Peak Timing) का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस लेख (Travel Guide) के माध्यम से यहाँ के इतिहास, कैसे पहुँचें, रोचक तथ्य आदि की जानकारी पर्यटकों की नीलकंठ पर्वत यात्रा (Badrinath Travel Guide) को पूर्ण करेगी।

अन्य साहसिक कार्य स्थलOther Adventurous Places

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